ठुमकैत-ठुमकैत आइब रहल अछि,
मस्त-मगन भ' गाइब रहल अछि,
चिन्हियौ त' ई के आबैया,
संग अपन कि सब लाबैया?
चिर-परिचित क्यो बुइझ परैया,
देख क' हमरा किया हॅंसैया?
ओ ल'ग में आयल आ कहलक-
मिथिला माई के पुत्र छी हम,
नूतन समाज के सूत्र छी हम,
लक्ष्य विकास के लाइब रहल छी,
संगी-सहयोगी ताइक रहल छी।
फेर ओ हमरा गौर स' देखलक, आ पुछलक-
आंहॉं लक्ष्य के साइध सकै छी?
कि आहॉं मैथिली बाइज सकै छी?
-जन्मेजय
मिथिला के नौनिहाल
स्वागत अछि सब गोटा के मैथिली ,मिथिला और मैथिल सब के समर्पित एहि ब्लौग पर।
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2 comments:
बहुत नीक.............आर हँ............हमहूँ मैथिली बाइज सकै छी.............|
Gr8 one Bhai [:)]
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