मिथिला के नौनिहाल

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Tuesday, October 21, 2008

आहॉं लक्ष्य के साइध सकै छी?

ठुमकैत-ठुमकैत आइब रहल अछि,
मस्त-मगन भ' गाइब रहल अछि,
चिन्हियौ त' ई के आबैया,
संग अपन कि सब लाबैया?
चिर-परिचित क्यो बुइझ परैया,
देख क' हमरा किया हॅंसैया?

ओ ल'ग में आयल आ कहलक-

मिथिला माई के पुत्र छी हम,
नूतन समाज के सूत्र छी हम,
लक्ष्य विकास के लाइब रहल छी,
संगी-सहयोगी ताइक रहल छी।

फेर ओ हमरा गौर स' देखलक, आ पुछलक-

आंहॉं लक्ष्य के साइध सकै छी?
कि आहॉं मैथिली बाइज सकै छी?

-जन्मेजय

2 comments:

Unknown said...

बहुत नीक.............आर हँ............हमहूँ मैथिली बाइज सकै छी.............|

Anonymous said...

Gr8 one Bhai [:)]