भाव-प्रवाहक सरस सरित,
अछि सर्वोत्तम,अछि मगन-मुदित,
ओ अछि हम्मर
मैथिली महान।
सबस' मधुर जे भाषा थिक,
उन्नयन'क जे आशा थिक,
ओ अछि हम्मर
मैथिली महान।
स्वर्णिम इतिहासक वाहक थिक,
नूतन भविष्य के साधक थिक,
ओ अछि हम्मर
मैथिली महान।
होयत जइ स' मिथिला'क उत्थान,
जे अछि वरेण्य ऑषुधिक समान,
ओ अछि हम्मर
मैथिली महान।
-जन्मेजय
मिथिला के नौनिहाल
स्वागत अछि सब गोटा के मैथिली ,मिथिला और मैथिल सब के समर्पित एहि ब्लौग पर।
Tuesday, October 28, 2008
मैथिली महान।
Tuesday, October 21, 2008
आहॉं लक्ष्य के साइध सकै छी?
ठुमकैत-ठुमकैत आइब रहल अछि,
मस्त-मगन भ' गाइब रहल अछि,
चिन्हियौ त' ई के आबैया,
संग अपन कि सब लाबैया?
चिर-परिचित क्यो बुइझ परैया,
देख क' हमरा किया हॅंसैया?
ओ ल'ग में आयल आ कहलक-
मिथिला माई के पुत्र छी हम,
नूतन समाज के सूत्र छी हम,
लक्ष्य विकास के लाइब रहल छी,
संगी-सहयोगी ताइक रहल छी।
फेर ओ हमरा गौर स' देखलक, आ पुछलक-
आंहॉं लक्ष्य के साइध सकै छी?
कि आहॉं मैथिली बाइज सकै छी?
-जन्मेजय
मस्त-मगन भ' गाइब रहल अछि,
चिन्हियौ त' ई के आबैया,
संग अपन कि सब लाबैया?
चिर-परिचित क्यो बुइझ परैया,
देख क' हमरा किया हॅंसैया?
ओ ल'ग में आयल आ कहलक-
मिथिला माई के पुत्र छी हम,
नूतन समाज के सूत्र छी हम,
लक्ष्य विकास के लाइब रहल छी,
संगी-सहयोगी ताइक रहल छी।
फेर ओ हमरा गौर स' देखलक, आ पुछलक-
आंहॉं लक्ष्य के साइध सकै छी?
कि आहॉं मैथिली बाइज सकै छी?
-जन्मेजय
Tuesday, September 11, 2007
सिखू मैथिली,,,learn maithili if u haven't
खाउ मैथिली,पियू मैथिली,
हम त' कहै छी -
सरिखन जियू मैथिली;
किछु कहबैक हुवै,
जे किछु लिखबैक हुवै,
धरि म'न के सुनू-
मैथिली के चुनू।
अपन मैथिली,ई सरस मैथिली,
एकरा अपन अंतःकरण में राखू।
पढू मैथिली,लिखू मैथिली,
जे नइ आबैत हुवै
त' सिखू मैथिली,,,
सरिखन जियू मैथिली।
--जन्मेजय
हम त' कहै छी -
सरिखन जियू मैथिली;
किछु कहबैक हुवै,
जे किछु लिखबैक हुवै,
धरि म'न के सुनू-
मैथिली के चुनू।
अपन मैथिली,ई सरस मैथिली,
एकरा अपन अंतःकरण में राखू।
पढू मैथिली,लिखू मैथिली,
जे नइ आबैत हुवै
त' सिखू मैथिली,,,
सरिखन जियू मैथिली।
--जन्मेजय
मिथिला के नौनिहाल,,,youth of mithila
मिथिला के नौनिहाल छी हम
काइल के लेल तैयार छी हम!
जे आइब रहल अछि
प्रखर-पुँज
ओइ नव युग के
आधार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
हम छी भविष्य अइ मिथिला के,
छी नौनिहाल अइ धरती के;
जे ताइक रहल अछि
घुइर-घुइर,
ओइ स्वर्णयुग के
आसार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
विपदा अनेक अइ धरती पर
अछि आइ मचेने त्राहि-त्राहि;
फइला जे रहल अछि
अनहार सघन,
ओइ दानव के
संहार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
अपावन भेल इ जानकी-ग्राम,
घट-घट पर रावण बइसल अछि;
जे नइ हुअक चाही
अइ धरती पर
ओइ अनीति के
प्रतिकार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
ध्वस्त करु अइ जर्जर के,
किछु नूतन आऊ स्रिजन करी;
जे अछि वरेण्य
अइ मिथिला लै,
ओइ क्रान्ति के
विस्तार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
-जन्मेजय
काइल के लेल तैयार छी हम!
जे आइब रहल अछि
प्रखर-पुँज
ओइ नव युग के
आधार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
हम छी भविष्य अइ मिथिला के,
छी नौनिहाल अइ धरती के;
जे ताइक रहल अछि
घुइर-घुइर,
ओइ स्वर्णयुग के
आसार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
विपदा अनेक अइ धरती पर
अछि आइ मचेने त्राहि-त्राहि;
फइला जे रहल अछि
अनहार सघन,
ओइ दानव के
संहार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
अपावन भेल इ जानकी-ग्राम,
घट-घट पर रावण बइसल अछि;
जे नइ हुअक चाही
अइ धरती पर
ओइ अनीति के
प्रतिकार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
ध्वस्त करु अइ जर्जर के,
किछु नूतन आऊ स्रिजन करी;
जे अछि वरेण्य
अइ मिथिला लै,
ओइ क्रान्ति के
विस्तार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
-जन्मेजय
about the blog,,,अइ ब्लौग के विषय में
सब लोकइन के जन्मेजय के नमस्कार।
हम मधुबनी निवासी एक विशुद्ध मैथिल छी और हमरा अइ बात के अफसोस अछि जे अपन प्रदेश में उच्च शिक्षा के लेल पर्याप्त व्यवस्था नइ अछि,तैं अखन अपन घर स' दूर कलकत्ता में रहि क' पढाई क' रहल छी।
पढाई हम फैशन डाज़ाइनिंग के क' रहल छी,,सँगहि स्वतंत्र-लेखन के क्षेत्र में सेहो कार्यरत छी,,मैथिली और हिन्दी में काव्य तथा गीत लेखन करइ छी।
अइ ब्लौग के माध्यम स' आँहाँ सब तक पहुँच क' आँहाँ सभ'क स्नेह और आशीष प्राप्त करै के प्रयास अछि।
अपने सब लोकनि के अत्त स्वागत अछि..... ई ब्लौग एक मैथील नौनिहाल के प्रयास छै अप्पन मात्रिभूमि स' जुरल रहि क' एकर विकास के लेल काज करै के,,,,आँहाँ सब स' सहयोग के अपेक्षा अछि।
हम मधुबनी निवासी एक विशुद्ध मैथिल छी और हमरा अइ बात के अफसोस अछि जे अपन प्रदेश में उच्च शिक्षा के लेल पर्याप्त व्यवस्था नइ अछि,तैं अखन अपन घर स' दूर कलकत्ता में रहि क' पढाई क' रहल छी।
पढाई हम फैशन डाज़ाइनिंग के क' रहल छी,,सँगहि स्वतंत्र-लेखन के क्षेत्र में सेहो कार्यरत छी,,मैथिली और हिन्दी में काव्य तथा गीत लेखन करइ छी।
अइ ब्लौग के माध्यम स' आँहाँ सब तक पहुँच क' आँहाँ सभ'क स्नेह और आशीष प्राप्त करै के प्रयास अछि।
अपने सब लोकनि के अत्त स्वागत अछि..... ई ब्लौग एक मैथील नौनिहाल के प्रयास छै अप्पन मात्रिभूमि स' जुरल रहि क' एकर विकास के लेल काज करै के,,,,आँहाँ सब स' सहयोग के अपेक्षा अछि।
धन्यवाद।
कवि के सॅंक्षिप्त परिचय
मधुबनी जिला'क करही गाम में एक कायस्थ परिवार में जनमल जन्मेजय पेशा स' एक फैशन डिजाइनर छथि,मुदा लेखन के क्षेत्र मे सेहो अत्यधिक रुचि राखैत छैथ।अपनेक कोनो पुस्तक अखन तक प्रकाशित नइ भेल छनि,किन्तु इन्टरनेट पर अपने नियमित रुप स' किछ वेबसाइट और ब्लौग पर लिखैत रहैत छियै।अपने हिन्दी तथा मैथिली,दुन्नू में समान रूप स' सक्रिय छियै और गद्य के अपेक्षा पद्य बेसी लिखैत छियै।
पिता श्री धीरेन्द्र कुमार मल्लिक व माता श्रीमती इन्दिरा मल्लिक के अप्पन आदर्श मान'बला व मॉं गायत्री के उपासक जन्मेजय के साहित्य में हुनक अप्पन मात्रिभूमि एवम मात्रिभाषा स' भारी लगाव देखल जा सकैथ अछि। मिथिला और मैथिली स' जुरल रचना के अलावा अपने मूलतः प्रेम एवम श्रॅंगार रस के रचना करैत छियै।
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