मिथिला के नौनिहाल

स्वागत अछि सब गोटा के मैथिली ,मिथिला और मैथिल सब के समर्पित एहि ब्लौग पर।

Tuesday, September 11, 2007

about the blog,,,अइ ब्लौग के विषय में

सब लोकइन के जन्मेजय के नमस्कार

हम मधुबन निवासी एक विशुद्ध मैथिल छी और हमरा अइ बात के अफसोस अछि जे अपन प्रदेश में उच्च शिक्षा के लेल पर्याप्त व्यवस्था नइ अछि,तैं अखन अपन घर स' दूर कलकत्ता में रहि क' पढाई क' रहल छी।

पढाई हम फैशन डाज़ाइनिंग के क' रहल छी,,सँगहि स्वतंत्र-लेखन के क्षेत्र में सेहो कार्यरत छी,,मैथिली और हिन्दी में काव्य तथा गीत लेखन करइ छी।

अइ ब्लौग के माध्यम स' आँहाँ सब तक पहुँच क' आँहाँ सभ'क स्नेह और आशीष प्राप्त करै के प्रयास अछि।

अपने सब लोकनि के अत्त स्वागत अछि..... ई ब्लौग एक मैथील नौनिहाल के प्रयास छै अप्पन मात्रिभूमि स' जुरल रहि क' एकर विकास के लेल काज करै के,,,,आँहाँ सब स' सहयोग के अपेक्षा अछि।

धन्यवाद।


कवि के सॅंक्षिप्त परिचय
मधुबनी जिला'क करही गाम में एक कायस्थ परिवार में जनमल जन्मेजय पेशा स' एक फैशन डिजाइनर छथि,मुदा लेखन के क्षेत्र मे सेहो अत्यधिक रुचि राखैत छैथ।अपनेक कोनो पुस्तक अखन तक प्रकाशित नइ भेल छनि,किन्तु इन्टरनेट पर अपने नियमित रुप स' किछ वेबसाइट और ब्लौग पर लिखैत रहैत छियै।अपने हिन्दी तथा मैथिली,दुन्नू में समान रूप स' सक्रिय छियै और गद्य के अपेक्षा पद्य बेसी लिखैत छियै।
पिता श्री धीरेन्द्र कुमार मल्लिक व माता श्रीमती इन्दिरा मल्लिक के अप्पन आदर्श मान'बला व मॉं गायत्री के उपासक जन्मेजय के साहित्य में हुनक अप्पन मात्रिभूमि एवम मात्रिभाषा स' भारी लगाव देखल जा सकैथ अछि। मिथिला और मैथिली स' जुरल रचना के अलावा अपने मूलतः प्रेम एवम श्रॅंगार रस के रचना करैत छियै।







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