मिथिला के नौनिहाल

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Tuesday, September 11, 2007

मिथिला के नौनिहाल,,,youth of mithila

मिथिला के नौनिहाल छी हम
काइल के लेल तैयार छी हम!

जे आइब रहल अछि
प्रखर-पुँज
ओइ
नव युग के
आधार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!

हम छी भविष्य अइ मिथिला के,
छी नौनिहाल अइ धरती के;
जे ताइक रहल अछि
घुइर-घुइर,
ओइ
स्वर्णयुग के
आसार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!

विपदा अनेक अइ धरती पर
अछि आइ मचेने त्राहि-त्राहि;
फइला जे रहल अछि
अनहार सघन,
ओइ
दानव के
संहार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!

अपावन भेल इ जानकी-ग्राम,
घट-घट पर रावण बइसल अछि;
जे नइ हुअक चाही
अइ धरती पर
ओइ
अनीति के
प्रतिकार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!

ध्वस्त करु अइ जर्जर के,
किछु नूतन आऊ स्रिजन करी;
जे अछि वरेण्य
अइ मिथिला लै,
ओइ
क्रान्ति के
विस्तार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!



-जन्मेजय

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